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शिवहर: बिहार में एक ऐसा गांव जहां शादी में लड़की वालों से मांगी जाती है नाव । शिवहर के पिपराही प्रखंड का बेलवा-नरकटिया इलाका। यहां हर साल बाढ़ और बारिश तबाही मचाती है। चार महीने लोग घरों में कैद रहते हैं। गांव चारों ओर से पानी से घिर जाता है। जिसके पास नाव होती है, वही निकल पाता है। ऐसे में यहां के लोगों के लिए नाव की अहमियत ज्यादा है। लड़कों की शादी में भी लड़की वालों से नाव ही मांगते हैं।

बिहार में एक ऐसा गांव जहां शादी में लड़की वालों से मांगी जाती है नाव

कहते हैं कि सूखे में तो पैदल या आटो-बस से भी आ-जा सकते हैं, बाढ़ में कैसे बाहर निकलेंगे। गांव की आधी से अधिक आबादी मछुआरों की है। तकरीबन एक हजार लोग दशकों से बागमती नदी की बाढ़ की तबाही झेल रहे हैं। गांव में जाने के लिए कच्ची सड़क भी नहीं है। सामान्य दिनों में तो खेतों व पगडंडियों के सहारे आना-जाना हो जाता है, बाढ़ में एकमात्र नाव ही सहारा होती है।

बिहार में एक ऐसा गांव जहां शादी में लड़की वालों से मांगी जाती है नाव

बेलवा-नरकटिया जिले के अंतिम छोर पर चंपारण से सटा इलाका है। बागमती इससे सटकर बहती है। नदी जरा सी अंगड़ाई लेती है तो पानी गांव में घुस जाता है। यहां सड़क के अभाव में शादी-विवाह जैसे आयोजन भी सही तरीके से नहीं हो पाते हैं। बरसात या बाढ़ में शादी होने पर दूल्हे को नाव से आना पड़ता है। इसी तरह बेटियों की भी विदाई होती है। दूल्हे को गोद में उठाकर मंडप तक पहुंचाया जाता है। जो लोग बाढ़-बारिश में होने वाली परेशानियों को जानते हैं, वे यहां रिश्ता तक नहीं जोड़ना चाहते हैं।

बिहार में एक ऐसा गांव जहां शादी में लड़की वालों से मांगी जाती है नाव

गांव के बिंदेश्वर सहनी बताते हैं कि बेटे सोमन की शादी की तो ससुराल वालों ने 11 लोगों की सवारी वाली नाव दी थी। अब यह कमाई का भी जरिया भी बन गई है। रामाश्रय सहनी बताते हैं कि यह इलाका काफी पिछड़ा है। यहां नाव ही जिंदगी बचाती है, इसलिए शादी में नाव लेते हैं।

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बुधन सहनी का कहना है कि नाव से हमारा पुश्तैनी काम चलता है। हम अपनी बेटियों की शादी में भी बतौर उपहार नाव ही देते हैं। इसके लिए कम से कम 11 लोगों की सवारी वाली नाव बनवाई जाती है। इसपर करीब 35 से 40 हजार का खर्च आता है।

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देश और दुनिया के लिए भले ही यह आश्चर्य का विषय हो और मामला अनोखा लगे लेकिन बिहार के कोसी क्षेत्र में बसे ऐसे सैकड़ों गांव हैं जहां लोग अपनी बेटियों का विवाह तय करने से पहले ही नाव के लिए आवश्यक तैयारी कर लेते हैं। दरअसल, उन्हें मालूम होता है कि लड़के वाले नाव की मांग अवश्य करेंगे। यह स्थिति लड़कों वालों के लिए भी फिट बैठती है। इस क्षेत्र में लड़के वाले भी दहेज में एक नाव की मांग अवश्य करते हैं।

By Biharkhabre Team

मेरा नाम शाईना है। मैं बिहार के भागलपुर कि रहने बाली हूं। मैंने भागलपुर से MBA की पढ़ाई कंप्लीट की हूं। मैं Reliance में कुछ समय काम करने के बाद मैंने अपना खुद का एक ब्लॉग बनाया। जिसका नाम बिहार खबरें हैं, और इस पर मैंने देश-दुनिया से जुड़े अलग-अलग विषय में लिखना शुरू किया। मैं प्रतिदिन देश दुनिया से जुड़े अलग-अलग जानकारी अपने Blog पर Publish करती हूं। मुझे देश दुनिया के बारे में नई नई जानकारी लिखना पसंद है।

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