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भागलपुर: भागलपुर में पहली बार काले अमरूद की खेती (Black guava cultivation in bhagalpur) शुरू हुई है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) में विकसित की गई अमरूद की इस अनूठी किस्म ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसके एंटी-एजिंग फैक्टर और रोग प्रतिरोधक क्षमता सामान्य फलों से ज्यादा होने की वजह से लोग इसे पसंद करेंगे। अंदर लाल गूदे के साथ काले अमरूद की इस विशेष किस्म में एंटीऑक्सिडेंट, मिनरल्स और विटामिन से भरपूर होने का दावा किया जा रहा है।

Black guava cultivation in bhagalpur

बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में दो साल पहले अमरूद का पौधा लगाया गया था। उसमें फलन अब शुरू हो गया है। एक-एक पौधे में चार से पांच किलो का फलन हुआ है। एक अमरूद औसतन सौ-सौ ग्राम के आसपास का है। बीएयू अब इस शोध में जुट गया है कि कैसे इस पौधे को आम किसान उपयोग में लाए। विशेषज्ञों के मुताबिक अभी तक देश में इस अमरूद का कमर्शियल उपयोग नहीं हो रहा है।

काले अमरूद की यह किस्म’ एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर

डॉ एम फेजा अहमद ने कहा कि अमरूद की यह किस्म एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है। 100 ग्राम अमरूद में लगभग 250 मिलीग्राम विटामिन-सी, विटामिन-ए और बी, कैल्शियम और आयरन के अलावा अन्य मल्टीविटामिन और मिनरल्स होते हैं। कुछ मात्रा में प्रोटीन और दूसरे फायदेमंद तत्व भी शामिल हैं। इस फल से लोगों के ‘एंटीएजिंग’ पर असर पड़ेगा। ये अमरूद अगस्त के अंत तक या फिर सितंबर तक पूरी तरह से पक जाएगा।

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विशेषज्ञ कहते हैं कि अभी तक देश में इस अमरूद का व्यावसायिक उपयोग नहीं हो रहा है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान (शोध) के सह निदेशक डॉ. फिजा अहमद ने जो जानकारी दी है उसके अनुसार बीएयू में पहली बार इसका फल लगा है। यहां की मिट्टी व वातावरण इस फल के लिए मुफीद (उपयुक्त) है। दो साल में यह फल देने लगता है। अब इसके प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है, ताकि यह बाजार में बिक सके।

Black guava cultivation in bhagalpur, काले अमरूद की खेती के लिए किसान काफी उत्सुक

Black guava cultivation in bhagalpur

काला अमरूद की खेती के लिए यहां के किसान काफी उत्सुक हैं और वह बीएयू से संपर्क में है। सुल्तानगंज के आभा रतनपुर के आम किसान विभूति सिंह ने बताया कि उनके पास आम के साथ 50 पौधे एल-49 व इलाहाबादी वेरायटी के हैं। अब बीएयू द्वारा जब किसानों के बीच यह पौधा वितरित किया जायेगा तो बाग में अधिक काला अमरूद लगाया जायेगा। उन्होंने बताया कि सुल्तानगंज, जगदीशपुर, नाथनगर, सबौर, कहलगांव, पीरपैंती आदि क्षेत्रों में हरे अमरूद की काफी उपज होती है। यहां के किसान इलाहाबाद सफेदा, एल-49, पंत प्रभात, ललित आदि वेरायटी के अमरूद का उत्पादन कर रहे हैं।

डॉक्टर्स का क्या कहना है काले अमरूद को लेकर 

जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (JLNMCH) में फॉरेंसिक मेडिसिन एंड टॉक्सिकोलॉजी के एचओडी डॉ. संदीप लाल ने कहा कि नए विकसित काले अमरूद ने मेडिकल से जुड़े लोगों का भी ध्यान खींचा है और इसी के मद्देनजर आगे रिसर्च की जरूरत है। एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होने कि वजह से ये फल कई बीमारियों का मुकाबला करने में सहायक हो सकते हैं। डॉ लाल ने कहा कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को रिसर्च में बीएयू के साथ सहयोग करना चाहिए और काले अमरूद के बारे में जागरूकता पैदा करनी चाहिए।

By Biharkhabre Team

मेरा नाम शाईना है। मैं बिहार के भागलपुर कि रहने बाली हूं। मैंने भागलपुर से MBA की पढ़ाई कंप्लीट की हूं। मैं Reliance में कुछ समय काम करने के बाद मैंने अपना खुद का एक ब्लॉग बनाया। जिसका नाम बिहार खबरें हैं, और इस पर मैंने देश-दुनिया से जुड़े अलग-अलग विषय में लिखना शुरू किया। मैं प्रतिदिन देश दुनिया से जुड़े अलग-अलग जानकारी अपने Blog पर Publish करती हूं। मुझे देश दुनिया के बारे में नई नई जानकारी लिखना पसंद है।

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