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बिहार के बांका प्रखंड क्षेत्र के बदरिया गांव के समीप चांदन नदी में करीब 2 हजार साल पुराने कुषान कालीन भवनों के अवशेष मिले है।नदी में करीब 50 फीट की दूरी तक बने पुराने भवनों का एक अवशेष मिला है। यह अवशेष यहां चांदन नदी के जमीन के अंदर पाई गई है।जहां ईट के साइज लंबाई 18 इंच, चौड़ाई 9 फीट एवं मोटाई करीब 2 इंच की निकली है। ईटों का बना यह अवशेष छठी शताब्दी के पहले की बताई जा रही है।

ग्रामीण सह सेवानिवृत्त शिक्षक परमानंद प्रेमी ने शनिवार को बताया कि छठ घाट बनाने के दौरान युवक ने नदी में बड़ी-बड़ी ईटे देखी थी। सूचना पर गांव के दर्जनों लोग नदी पहुंचे और अवशेषों को देखा।पुरातात्विक सह पूर्व सीओ सतीश कुमार का मानना है कि जिस तरह का ईट की तस्वीर मिली है। उससे स्पष्ट होता है कि यह ईट हाथ से थापकर बनाया गया है। तथा इसे धान के डंठल से पकाया गया है। महात्मा बुध की पहली चारिका के नाम पर विशाखा का नाम आता है।

मनोज कुमार चौधरी एसडीएम बांका ने बताया कि भदरिया चांदन नदी में मिले अवशेषों की रिपोर्ट पुरातत्व विभाग को दी जा रही है। तत्काल स्थानीय पुलिस को नदी एवं अवशेष स्थल की निगरानी के लिए चौकीदार की प्रतिनियुक्ति करने का निर्देश दिया गया है।

प्राचीन ग्रंथों के अनुसार भदरिया गांव में भगवान बुद्ध के पहुंचने की चर्चा है। वैशाली के बाद भगवान बुद्ध चारिका करते हुए यहां पहुंचे थे। जिसको लेकर वर्तमान में गांव के समाजसेवी लखन लाल पाठक के द्वारा क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। मालूम हो कि विगत 2018 में विशाखा को लेकर जापान के बुद्ध भिक्षु किरनी हुतो भदरिया गांव पहुंचे थे।जिन्होंने यहां पहुंचकर तत्कालीन गवर्नर के द्वारा दिए गए बौद्ध वृक्ष को लगाया गया था।

By Biharkhabre Team

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