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नई दिल्ली: विशेष विवाह अधिनियम (एसएमए) के तहत समलैंगिक विवाह की मान्यता की मांग को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत अन्य पक्षकारों से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायमूर्ति डीएन पटेल व न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई 27 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी। साथ ही मुख्य पीठ ने मामले से जुड़ी एक अन्य नयी याचिका को भी सभी याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध कर दिया।

समलैंगिक विवाह की मान्यता की मांग

समलैंगिक विवाह की मान्यता की मांग

अधिवक्ता करुणा नंदी के माध्यम से जायदीप सेनगुप्ता और अमेरिकी नागरिक रसल ब्लेन स्टेफेन्स ने याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता फ्रांस के पेरिस में रहने वाला एक विवाहित समलैंगिक जोड़ा है। वे 2001 में न्यूयॉर्क में मिले थे और लगभग 20 वर्षों से एक प्यार भरे रिश्ते में हैं। याचिकाकर्ताओं ने 6 अगस्त, 2012 को न्यूयॉर्क में शादी की और अमेरिका, फ्रांस और कनाडा में कानूनी रूप से विवाहित जोड़े के रूप में पहचाने जाते हैं- वे तीन देश जहां वे मुख्य रूप से पिछले 20 वर्षों में रहे और काम किया और अब वे तैयारी कर रहे हैं माता-पिता के रूप में उनकी नई भूमिका के लिए तैयारी कर रहे हैं और वे जुलाई 2021 में अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रहे हैं।

समलैंगिक विवाह की मान्यता की मांग

इस दंपति में से एक भारतीय मूल का है और अब उसने इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए जल्द से जल्द ओसीआई का दर्जा हासिल करने की मांग की है ताकि वह अपने जीवनसाथी और बच्चे के साथ जिसकी वे उम्मीद कर रहे हैं भारत में समय बिता सके जहां उसका परिवार रहता है। वीजा हासिल करने के लिए स्टेफेन्स की योग्यता की कानूनी जानकारी के लिए याचिकाकताओं ने सूचना के अधिकार के तहत सूचना मांगी थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।

केंंद्र सरकार ने किया था विरोध

केंद्र सरकार इस मामले का ये कहते हुए विरोध कर रही है कि याचिकाएं टिकाऊ, अस्थिर और गलत हैं और साथ ही उन्हें खारिज करने की मांग की है। केंद्र ने तर्क दिया है कि विवाह अनिवार्य रूप से दो व्यक्तियों का एक सामाजिक रूप से मान्यता प्राप्त संघ है जो या तो असंबद्ध व्यक्तिगत कानूनों या संहिताबद्ध वैधानिक कानूनों द्वारा शासित होता है।

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याचिकाओं के जवाब में दिल्ली हाई कोर्ट को पहले बताया था कि एक ही लिंग के दो व्यक्तियों के बीच विवाह की संस्था की स्वीकृति को न तो मान्यता प्राप्त है और न ही किसी भी असंबद्ध व्यक्तिगत कानूनों या किसी संहिताबद्ध वैधानिक कानूनों में स्वीकार किया जाता है। वहीं याचिकाकर्ता हिंदू विवाह अधिनियम, विशेष विवाह अधिनियम और विदेशी विवाह अधिनियम के तहत मान्यता की मांग कर रहे हैं।

By Biharkhabre Team

मेरा नाम शाईना है। मैं बिहार के भागलपुर कि रहने बाली हूं। मैंने भागलपुर से MBA की पढ़ाई कंप्लीट की हूं। मैं Reliance में कुछ समय काम करने के बाद मैंने अपना खुद का एक ब्लॉग बनाया। जिसका नाम बिहार खबरें हैं, और इस पर मैंने देश-दुनिया से जुड़े अलग-अलग विषय में लिखना शुरू किया। मैं प्रतिदिन देश दुनिया से जुड़े अलग-अलग जानकारी अपने Blog पर Publish करती हूं। मुझे देश दुनिया के बारे में नई नई जानकारी लिखना पसंद है।

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