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भागलपुर: भागलपुर में पीरपैंती प्रखंड के डॉक्टर दिलीप कुमार सिंह को समाज और चिकित्सकीय सेवा में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इंडियन मेडिकल  एसोसिएशन भागलपुर (IMA Bhagalpur) के “गॉडफादर” रहे डॉ सिंह ने गरीबों और बेसहारों को जीवन दान देने के लिए डॉक्टरी पेशे को अपनाया था। ऐसे समय में जब ज्यादातर डॉक्टर शहर में में रहकर की प्रैक्टिस करते हैं। उन्होनें गांव में ही मोर्चा संभाला। डॉ दिलीप कुमार सिंह के पुत्र संजय सिंह, पुत्र वधू प्रतिभा सिंह समेत पौत्र भी डॉक्टर हैं। भागलपुर में डॉक्टर संजय सिंह की बेहतरीन सर्जन में गिनती होती है।

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित

पीरपैंती का इलाका झारखंड की सीमा से जुड़ा है। ऐसे में उन्होंने आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया। पोलियो और कालाजार जैसी बीमारियों के खिलाफ उन्होंने मुहिम छोड़ दी थी। हालांकि वह पोलियो की वैक्सीन दुबारा इसलिए नहीं मांग पाए, क्योंकि वैक्सीन को रखने के लिए कोल्ड चेन बनाने में दिक्कत होती थी। गांव में बिजली नहीं रहने के कारण बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। लेकिन गरीब लोगों का सस्ता इलाज और जिनके पास रुपए नहीं थे उनका मुफ्त में इलाज करने का काम शुरू किया।

देश की सेवा करने के लिए अमेरिका कि छोडी थी नौकरी

92 वर्ष के हो चुके डॉ दिलीप कुमार सिंह ने डॉक्टरी पास करने के बाद पिछले 68 सालों से अनगिनत गरीबों और लाचार लोगों का मुफ्त और मामूली पैसा लेकर इलाज किया है। डॉक्टर दिलीप सिंह को पद्मा भूषण मिलने की जानकारी मिलते ही सिल्क सिटी के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। डॉ दिलीप कुमार सिंह का जन्म बांका जिला में 26 जून 1926 में हुआ था। डॉ दिलीप सिंह एक फिजीशियन डॉक्टर थे। 1952 उन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। उसके बाद डीटीएम एंड एच इंग्लैंड से किया। पढ़ाई खत्म करने के बाद वह अमेरिका भी गए। वहां नौकरी भी की लेकिन उनका मन नहीं लगा। देश की सेवा करने के जज्बे ने उन्हें वहां से लौटने के लिए बाध्य कर दिया।

उनके बारे में एक कहानी प्रचलित है एक बार दिलीप कोलकाता घूमने पहुंचे, तो चौरंगी से गुजरते समय उनकी नजर पैन अमेरिका के कार्यालय और उसके छोटे से हवाई जहाज पर पड़ी। वे हवाई जहाज देखने लगे। लेकिन एक अंग्रेज ने दिलीप को सड़क पर ले जाकर धक्का दे दिया, बाद में वो समय भी आ ही गया जब वे पढ़ाई करने अमेरिका के लिए निकले। 1965 में उन्होंने उसी पैन अमेरिका का विमान कोलकाता से पकड़ा। और विश्व  दमा कॉन्फ्रेंस में शिरकत की। न्यूयॉर्क के माउंट वर्नन अस्पताल से पढ़ाई की। कनाडा में भी पढ़ाई की। कई देशों की यात्राएं की लेकिन विदेश की चकाचौंध भरी दुनिया छोड़ ये पीरपैंती आ गए और गरीबों की मदद की। https://www.biharkhabre.com/साइकिल-गर्ल-ज्योति-कुमार/

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ दिलीप सिंह का आजादी की लड़ाई में भी था योगदान

बात यहीं खत्म नहीं होती। डॉ दिलीप सिंह जब हाई स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे। उस समय आजादी के दीवानों के साथ हो लिए थे। देश की आजादी का जज्बा हिलोर मारने लगा। तब उन्होंने अपने दोस्तों के साथ अपने ही स्कूल को बम से उड़ाने की योजना बना ली। हालांकि योजना लिक हो गई और अंग्रेज कलेक्टर ने उन्हें काफी समझाया बुझाया उसके बाद वह माने।

इन्होंने अपने पिताजी के नाम से राष्ट्रीय राजमार्ग से सरकारी अस्पताल तक अपनी जमीन देकर सड़क बनवाई अपने पिता के नाम पर आंख का एक अस्पताल भी खोला है। अपने जीवन के संघर्ष पर एक किताब भी उन्होंने लिखी है “मेरी कहानी मेरी जुबानी”

By Biharkhabre Team

मेरा नाम शाईना है। मैं बिहार के भागलपुर कि रहने बाली हूं। मैंने भागलपुर से MBA की पढ़ाई कंप्लीट की हूं। मैं Reliance में कुछ समय काम करने के बाद मैंने अपना खुद का एक ब्लॉग बनाया। जिसका नाम बिहार खबरें हैं, और इस पर मैंने देश-दुनिया से जुड़े अलग-अलग विषय में लिखना शुरू किया। मैं प्रतिदिन देश दुनिया से जुड़े अलग-अलग जानकारी अपने Blog पर Publish करती हूं। मुझे देश दुनिया के बारे में नई नई जानकारी लिखना पसंद है।

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